जब जब मैं इस अँधेरी रात में चाँद को देखता हूँ,
तो वह तुम ही हो जो मुझे याद आती हो।
जब तट पर बैठे समुद्र की इन ऊँची लहरो को देखता हूँ,
तो तुम ही हो जो इन लहरो को एक मतलब देती हो।
जब यह हवा के ठन्डे झोंके मेरी रूह को ताज़गी से भर देते हैं,
तो तुम ही हो जो हर सांस में मेरे अंदर भर जाती हो।
जब यह चिड़िया चहचहा कर इन तन्हाईयो को भर देती है,
तो तुम ही हो जो इन चिड़ियों की आवाज बनती हो।
यहाँ वहाँ,
हर जगह बस तुम ही बसी हुई हो।
तेरी इन अदभुत रासो में खो जाना चाहता हूँ ,
तेरी इन रहस्य भरी बातो को सुलझाना चाहता हूँ मैं।
अब इसके अलावा कुछ और नहीं सूझता,
बस तेरी यादो में खो जाना चाहता हूं मैं।
मेरी पहली पसंद भी तुम,
पहली मोहब्बत हो तुम।
विज्ञान तुम हो, प्रकृति हो तुम।
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