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विज्ञान तुम हो, प्रकृति हो तुम।
जब जब मैं इस अँधेरी रात में चाँद को देखता हूँ,तो वह तुम ही हो जो मुझे याद आती हो।जब तट पर बैठे समुद्र की इन ऊँची लहरो को देखता हूँ,तो तुम ही हो जो इन लहरो को एक मतलब देती हो।जब यह हवा के ठन्डे झोंके मेरी रूह को ताज़गी से भर देते हैं,तो…